"उड़ते हुए पंछियों को देख कर ,
मैं अपना आसमान ढूंढता हूं
इस सरजमी में अपने मुकाम ढूंढता हूं
खयालों में हकीकत की बाहर ढूंढता हूं
बहती हवा में मंजिलों की प्रारंभिक स्वास ढूंढता हूं
हर गुजरते वक्त में खुद की पहचान का पहर ढूंढता हूं
नदियों की लहरों को चीरते ख्याल ढूंढता हूं
मंजिल पर बैठे अपने जैसे किसी शख्स को आईने में ढूंढता हूं
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