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तलवार, खंजर, गोली बंदुक और क्या क्या है।

तलवार,खंजर,गोली,बंदुक और क्या क्या है
मुझे खत्म करने को न जाने इंतज़ाम और क्या क्या है।
वैसे तो निगाहों से रोज़ तुम कत्ल करतीं हो
मगर तेरे जेहन में अभी चल रहा और क्या क्या है।
खुदा गर बख्श भी दे तो तुझसे बच नहीं सकता
क्योंकि कातिल तेरी जुल्फें,ये होंठ और क्या क्या है।
ये जानकर भी ये दिल क्यों खुदकुशी करने को है तैयार
जिम्मेवार तेरी अदा मुस्कुराना लुभाना और क्या क्या है।
मैं अपने शहर का था इमाम मगर यहां तेरा गुलाम हूं
ढा लो कहर जो गुस्सा, इंतकाम और क्या क्या है।
ख़ुद से चल कर आ पहुंचा है अनुराग मक़तल पर
आखिरी ख्वाहिश है पिला दो जाम ज़हर और क्या क्या है।
©anuragrahi