खुदा की फरमाइश थी उषा की नुमाइश थी ।
जिंदगी ने कुछ यूं मोड़ लिया, अब अकेले रहने की ख्वाहिश थी ।
लगा छोड़ दु दुनिया को उसी हाल पर
बन जाऊ बैरागी इस दुनिया की ।।
जूझ रही हू कुछ मुश्किल दौर से
अपनी रूह को छोड़ दिया है मैंने वही किसी मोड़ पे ।।
अब जीना है अपने लिए
किसी ने रोका है किसी के लिए
अब इंतजार है बस उस एक घड़ी की
जब, दुनिया होगी उषा की.....
©u. y
©u.y
U