न शिकवे, न शिकायतें न कोई ख्वाहिश बची,
ऐ ज़िन्दगी तू उदासियों की बस आजमाइश बनी !
मंज़िलों की आशा में टूटा ये मीनार सा,
रास्तो में भटकता, पत्थरों के खाक सा !
खुद में सिमटी, खुद में सहमी, परछाई सी रह गयी,
ये ज़िन्दगी तू अधूरी सी कहानी रह गयी !!
©maahisingh
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