तोड़ कर रिश्ता मुझसे वो मेरे सिरहाने सो गईं
न कुछ बोलती न कुछ सुनती मुझे रूलाने सो गईं।
अभी अभी तो नई सहर में आंखें खोली थी
अभी अभी वो किस गहरी नींद में सो गईं।
जाने कैसा मर्म बसा था उनकी आंखों में
जाने कौन सा दर्द छुपाने फिर सो गईं।
हमारे बिच तो जागते रहने की लगी थी शर्त
शायद वो मुझे जिताने के लिए सो गईं।
अश्कों से भीगी आंखों को अक्सर पोछा करती
फिर क्युं ख़ुद वो मेरे अश्क बहाने के लिए सो गईं।
भुल गया था मैं उनकी मौजूदगी को जीवन में
शायद अनुराग'वो याद दिलाने के लिए सो गई।
©anuragrahi
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