जन्म से पहले ही दवाई ले रहे हैं,
जन्म लेते ही दवाई दी जाती है,
आज रोटी कम, दवाई ज्यादा खा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
नामकरण के लिए शास्त्रों को उठाया जाता था,
नामकरण के अवसर पर रिश्तेदारों को बुलाया जाता था,
आज केवल internet का सहारा ले रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
खुले आसमान के नीचे पेड़ों की छांव में पढ़ाई होती थी,
कभी कभी शिक्षक की छड़ी से कुटाई होती थी,
आज A. C. के कमरे में विद्यार्थी ही शिक्षक को पढ़ा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
खुले मैदानों में खेल खेलने जाते थे,
मिट्टी में खेल कर हृष्ट पुष्ट रहते थे,
आज mobile पर games खेलकर बीमार होते जा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
घर का मुखिया परिवार के साथ बैठता था,
माँ बाप की इच्छा बिना घर में इक पत्ता ना हिलता था,
आज बच्चों के हाथ मोबाइल दे देते है और
बच्चे माँ बाप को वृद्ध आश्रम ले जा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
शादी में रिश्तेदार बुलाए जाते थे,
घर में पकवान बनाये जाते थे,
आज होटलों में program किए जा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
औरत सिर पर पल्लू लेकर रहतीं थी,
सुंदरता के लिए सोलह श्रृंगार करतीं थीं,
आज फैशन के नाम पर कपड़े छोटे और
सुंदरता के लिए मेकअप करवा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
आदमी धोती कुर्ता पहना करते थे,
सिर पर पगड़ी धारण करते थे,
आज फैशन की दौड़ में फटे कपडे़ पहने जा रहे हैं,
क्योंकि हम तरक्की की राह पर जा रहे हैं,
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©vikasgarg
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