V

तृष्णा

कोई ठोकर लगी अचानक
जब-जब चला सावधानी से
पर बेहोशी में मंजिल तक
जा पहुँचा हूँ आसानी से
रोने वाले के अधरों पर,
अपनी मुरली धर देने से
मैंने अक्सर यह देखा है,
मेरी तृष्णा मर जाती है ।
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©vikasgarg