हुआ करते थे क्भी हम आजाद परिन्दे आज तेरी यादो के पिजरे में कैद है !!
आंखों में आंसू लिए चलते है लबो पे झूठी मुस्कान है !!
बदल गया ये वक्त भी बेव्क्त सा ना जाने क्यु तुम साथ तो हो पर आज तुम भी वो तुम ना हो !!
इश्क तो तुम्हारा पहले भी कहा सचा था आंखों में फ़रेब जुबान पर "पागल" का बोलबाला था !!
अभी भी क्भी कुछ फ़ुरसत से वक्त निकाल कर मेरे पास आ खुद को मुझ को भूल कर हमसे मिलने आ !!
कोशिश बहुत करता हूँ तुझे भुलने कि पर दिल है ना कन्हा भुल पाता है !!
दोस्तों की महफ़िल मे होता है तेरे नाम का जिक्र जब क्भी भी "भाई तेरी bndi " कह कर तेरा हाल सुनाया जाता है !!
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©rohit1234
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