S

तुझे पता था कभी मैं तुझे इस तरह सजाऊंगा।

तुझे पता था कभी मैं तुझे इस तरह सजाऊंगा
आज़ के बाद चाह कर भी तुझे देख नहीं पाऊंगा।
गुजरेंगे गिन गिन कर मेरे अब ये हर रात दिन
अंदाजा नहीं तुझे एक रात में कितने आंसू गिराऊंगा।
जिया हूं मैं अब तक बस तेरे ही साये में
बाहर के तेज़ धुप से खुद को कैसे बचाऊंगा।
मेरी पहचान जो अब तक तेरी पहचान ही से थी
अजनबी हूं दुनिया में नजरों से नज़र कैसे मिलाऊंगा।
मेरे मिजाज की फितरत थी शाम को घर जो लौट आना
इस क़दर रूसवा हूं तुझसे,लौट कर घर नहीं आऊंगा।
तुझे फकत अब बस अपने जन्नत से बाबस्ता है मगर
मैं अनुराग हवा के साथ-साथ दूर दूर तक जाऊंगा।
©anuragrahi