तुझसे इश्क़ बेशुमार करती हूँ,
तेरे नाम से हर सुबह शुरू, हर शाम करती हूँ।
तेरी यादों की रौशनी में ही,
मैं अपनी हर धड़कन तमाम करती हूँ।
तेरा इंतज़ार बेहिसाब करती हूँ,
वक़्त से भी तेरे लिए बग़ावत करती हूँ,
हर आहट में तुझे ढूँढती हूँ यूँ,
जैसे रूह तेरी ही इबादत करती हूँ।
दिल मे ये अरमान दबा रखा है
मिल ले एक बार मुझसे,
इस साँस के छूटने से पहले,
कह दूँ जो दिल में छुपा रखा है,
इन लफ़्ज़ों के टूटने से पहले।
शायद फिर ये मौका ना मिले,
शायद फिर ये रात ना आए,
मेरी ख़ामोश मोहब्बत का किस्सा,
तेरे बिना अधूरा रह जाए।
ख़ुदा से बस यही इल्तिज़ा करती हूँ —
या तो तुझे मेरा मुक़द्दर बना दे,
या मेरे दिल को इतनी सब्र दे,
कि तेरी यादों में भी सुकून आ जाए।
-शिवन्या
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