तुम्हारे जाने के चंद दिनों पहले मुजे पता चला ये इश्क़ था, पर तुम्हे जाना था, और मुजे तुम्हे जाते हुए देखना था। क्योंकि खुद ही से शर्त जो लगाई थी, तुम्हे खुशी खुशी विदा करेंगे। याद है जब हम आखरी बार मिले थे, और तुमने नजरे चुराते हुए अपने लफ्ज़ो को मेरे लबों पे किसि कविता की तरह लिख दिया था,
और मैने उसे किसी प्रसाद की तरह माथे से लगा लिया था। बस उसी लम्हे में सिमट सी गई हूं मैं, वही दो पलो में मैने तुम्हे खो कर पा लिया था या पाकर खो दिया था , अभी तक वो पहेलियाँ सुलजा रही हु।
©mishti
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