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तुम

कल तुम्हारी तस्वीरो से गुफ़्तगू हुई, बड़ी कमज़र्फ आंखे है मेरी , यू ही टेसवे बहाने लगी। कल एहसास हुआ तस्वीरों वाले तुम ज्यादा बातें नही करते, मेरी पागलपन भरी निगाहों में शर्मोहया का काजल नही लगाते। मेरी बेफिक्री पे हस कर मेरे गालों पे उंगलियों से अपनी बातें नही लिखते। तस्वीर वाले तुम ना बड़े सयाने हो, मेरे उलझें हुए बालों से मेंरे कहने पर भी अटखेलियां नही करते। मेने तुमसे कहाँ कल, सुनो जरा सा डर हैं, तुम्हें खोने का.... पर तुमनें बाहें ना फैलाई, उसी वक्त महसूस हुआ महज़ तसवीर हैं तुम्हारी वो, तुम्हारे इंतेज़ार की हमसफ़र, मंजिल आने तक दिल को संभाल के रखेंगी। क्योंकि तुम्हें दूर से देखने पर लबो पे हँसी होंनी चाहिए , आंसू तुम्हारे अश्क को धुंधला कर ना दे।
©mishti