तुम आन हो मेरी इनायत हो
मैरे उम्र भर की इबादत हो।
मेरे लफ्ज़ अब तो बेअसर ही रहे
तु दिल से लिखी गई इबारत हो।
किस लिए देखती हो तुम आईना
तु खुद से ही खुबसूरत हो।
तुम्हें छूने से कौन सा जि न चाहे
तुम शोला हो और पुरी कयामत हो।
मगर किस तरह छोड़ दूं तुझे जानाँ
तूम मेरी हर खुशी की आदत हो।
है मेरी तमन्ना कि तुम्हें अनुराग के सिवा
अब हर शायरों से वहशत हो।
©anuragrahi
S