सहर भी तुम हो,
शब भी तुम हो,
सियारा भी तुम हो,
शुआएँ भी तुम हो,
तसव्वुर भी तुम हो,
जा'न फ़िज़ा भी तुम हो,
हसरत भी तुम हो,
हयात भी तुम हो,
क़ल्ब भी तुम हो,
क़ुरबत भी तुम हो,
आफ़ियत भी तुम हो,
तस्कीन भी तुम हो,
फ़क़त बस तुम ही हो।
बस तुम ही हो।
©deeprichu
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