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तुम हमेशा पूछते हो क्या लेकर आऊँ तुम्हारे लिए, तो अबकी बार तुम जब आओ कोई महँगा…

तुम हमेशा पूछते हो
क्या लेकर आऊँ तुम्हारे लिए,
तो अबकी बार तुम जब आओ
कोई महँगा तोहफ़ा, कोई गहना
या कोई बड़ी चीज़ मत लाना।

अबकी बार जब आओ,
अपने शहर का ढलता हुआ सूरज ले आना,
थोड़ा सा जो तेरे साथ-साथ
सड़कों पर चलता है,
जिसे तेरे होंठों को चूमकर
मैं भी हो जाऊँ ज़रा सी लाल।

अबकी बार थोड़ा सा समंदर
भर लाना अपनी जेब में सीपियों के साथ,
जिन्हें छूकर मैं भी
हो आऊँगी समंदर किनारे
तेरे साथ।

अबकी बार तुम
अपने साथ तेरे शहर की बारिश ले आना,
अपने छाते में भिगोकर,
जिसे ओढ़कर मैं भी
भीग लूँ कुछ पल
तेरे साथ।

अबकी बार तुम
अपने शहर की सुबह ले आना,
वहाँ की किसी चाय-समोसे की दुकान से,
जिसे चखकर मैं भी
शुरूआत कर लूँ
एक सुबह तेरे साथ।

अबकी बार तुम
अपने साथ मेरे लिए
तेरे सिरहाने का तकिया ले आना,
जिसे लगाकर थोड़ी देर
मैं भी सो लूँ सुकून से
तेरे साथ।

अबकी बार
तू थोड़ा सा खुद को भी ले आना,
कुछ तस्वीरों में अपने साथ,
ताकि जब तू वापस जाए
तो तेरी कमी
इतनी महसूस न हो हर रात।

अबकी बार
तू बस ये करना…
आना ऐसे
कि तेरे जाने के बाद भी
मेरे कमरे में
थोड़ा सा तू ठहरा रहे।