मैं कभी ख्वाब नहीं देखता
क्योंकि मेरे पास तुम हो
किसी से आस नही करता
क्योंकि मेरा विश्वास तुम हो
किसी से दोस्ती नहीं रखता
क्योंकि मेरी खासमखास तुम हो
किसी से कोई वैर नहीं रखता
क्योंकि मेरी हंसी परिहास तुम हो
किसी की कमी कभी नहीं खलती
क्योंकि मेरा सुख निवास तुम हो
किसी और की जरूरत नहीं पडती
क्योंकि मेरे चमन की बहारे खास तुम हो
किसी कडवाहट का कभी अनुभव नहीं करता
क्योंकि मेरी जिंदगी की मिठास तुम हो
किसी और किताब को मैं नहीं पढता
क्योंकि मेरी पूरी किताब रास तुम हो
©abykv
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