तुम कुछ यूँ करना प्रिये 🙏🙏
कुछ इस तरह प्रेम निभाना प्रिये,
कि प्रेमी के साथ मेरे मित्र भी बन जाना प्रिये।
प्रेमिका होकर शायद कुछ बातें न कह पाऊँ कभी,
किन्तु मित्र बनकर हर ज़ख्म दिखा जाऊँगी तुम्हें।
कभी उदास हो जाऊँ अगर प्रिये,
अपने ही ग़मों में कहीं खो जाऊँ प्रिये,
तो बस इतना करना कि
मेरे मौन को भी सुन लेना प्रिये,
और मेरा हाथ थामकर
मुझे मुझसे ही मिला देना प्रिये।
हाँ, इतना साथ निभाना प्रिये,
कि जब शब्द मेरा साथ छोड़ दें,
तब तुम मेरी ज़ुबान बन जाना प्रिये।
प्रेम सुकून देता है, यह सच है,
किन्तु मन के अनकहे एहसासों को
केवल मित्रता ही समझ पाती है, प्रिये।
और यदि कभी मैं स्वयं को भी न समझ पाऊँ,
तो मेरे मन का आईना बन जाना प्रिये। ❤️🌿
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