तुम न रूठों कभी न रूठाया करों
आपका घर है आया जाया करों।
मुस्कुराहटों से निखरती है तेरी सूरत
जेंबरों की तरह होंठों पर सजाया करों।
दिल में सुलग रही है इक शरारे सी
मौका निकाल के इसे बुझाया करों।
तुम जो रूठे तो ज़माना रूठ गया हमसे
बेचारे दिल को तुम्हीं समझाया करों।
हुकुम चलाना भी बस ये सखावत ही है
खिदमत में मुझे भी कुछ फ़रमाया करों।
कितने रंगीं मिजाज हो तुम अनुराग
बेवफा के गली में न कभी जाया करों।
©anuragrahi
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