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तुम रानी नहीं हो तुम परियों की रानी हो ।

तुम रानी नहीं हो तुम परियों की रानी हो
सचमुच तसव्वुर में मेरे तुम प्रेम दिवानी हो
आंखों में पिरोय हूए मधुशाला मस्तानी हो
तुम हर बेचैन दिल की उलझी हूई जवानी हो
ब्यां कर न पाऊं जुबां से मैं तुम वो कहानी हो
एक मंद मंद चलती हुईं हवा रूहानी हो
मेरे हर एक हरकतों का वो तुम ही नदानी हो
मगर हम दिलजलो के लिए सच्चा उस्मानि हो
मेरा मकसुद कि मेरा घर अब तेरे नूर से नूरानी हो
हम बंध जाए एक बंधन में कि बाद न पछतानी हो
एक बार तू भी कह दो जज्बात जो तेरे दरम्यानी हो
हमनें कह दिया जान-ए-जां बस तुम मेरी ही रानी हो।
©anuragrahi