A

तुम्हीं कहते थे न!!!

तुम्हीं कहते थे न!
मेरे प्यार में डूबना है
मेरे रंग में रंगना है
न दिन न रात
न आंधी न बरसात
बस रहना है साथ साथ
कितनी कसमें खाई थी
कितने वादे किए थे.....
तुम्हीं कहते थे न!!!
हमारी मंजिल एक है
हमारे दो जिस्म एक जान हैं
मगर अब......
दुनियां अलग बसा ली
मना रहे अपनी दीवाली
राह में मिलते हीं अजनबी हो जाते हो
तोड दिया सपनों का महल
खिलने न दिया दो दिल का कमल.....
क्या मजबूरियां रिश्तों पे होती हैं भारी
क्या दिलों को निभानी होती दुनियादारी
अब तो प्यार से उठ गया भरोसा
बस जिंदगी जीने का हो सलीका
ऐसी चोट क्या खानी जो ताउम्र जख्म दे
उपर से ठीक मगर भीतर से आंख नम दे
©abhidilse