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तुमसे कहते हैं

हाथ तुम्हारा हाथ में लेकर साथ की रहती चाह सदा ,कुछ राहों पर साथ चले हैं मंजिल तक रहना है साथ, हो जाए खामोश राह में और लम्हे खामोश रहे ,कमी नहीं है यह तो कोई खामोशी यह साथ रहे ,खामोशी से घबराकर जो साथ छोड़ कर जाते हैं, सत्य नहीं जीवन का वह जो राहों में छोड़ जाते हैं ,प्यार मेरा था साथ तुम्हारे तुम कहते हो खुद को तन्हा, तनहा थे हम बिना तुम्हारे, हम तनहा रहते ही नहीं ,साथ तुम्हारे जीते हैं साथ तुम्हारे मरते हैं, तुम मेरा प्यार हो सदा बस यही तुमसे कहते हैं,!
©pritis