एक शूकून सा मिला है
तुमसे मिलकर
एक प्यास सी बुझी है
तुमसे मिलकर....
जिंदगी सहरा में थी
कितनी पहरा में थी
खुशियों के बादल कहां थे
हंसी की दुपहरी नहीं थी
तुम मिले थे नसीब बनकर
जीने की तरकीब सूझी
तुमसे मिलकर....
आए हो तो फिर जाने न दूंगी
जिंदगी फिर खाक होने न दूंगी
बसा लूंगी काजल में नयनों के
फंसा लूंगी आगोश में बंधनों के
बना लूंगी सतरंगी जहां
तुमसे मिलकर....
हां तुमसे मिलकर......।.।
©selfmade
A