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“तू क्यों चला गया” मेरा सबसे अच्छा दोस्त तू ही तो था, जिससे लड़ती भी थी, पर रूठ…

“तू क्यों चला गया”
मेरा सबसे अच्छा दोस्त तू ही तो था,
जिससे लड़ती भी थी, पर रूठ नहीं पाती थी कभी ज़्यादा।
हर छोटी बात जो दुनिया से छुपा लेती थी,
वो बिना सोचे तुझे बता जाती थी।

तेरा अंदाज़ सबसे अलग था,
तेरी मुस्कान बहुत प्यारी थी।
मुझे बेवजह बहुत चिढ़ाता था,
और कुछ भी बकवास कह जाता था —
पर पता नहीं क्यों, वही बातें सबसे अच्छी लगती थीं।

तेरी हँसी में एक सुकून सा मिलता था,
तेरी डाँट भी जैसे प्यार ही लगता था।
जब bhi मैं टूटने लगती थी अंदर से,
तू ही था जो चुप-चाप संभाल लेता था।

ना जाने कितनी बातें अधूरी रह गईं,
कितनी हँसी तेरी यादों में कहीं खो गई।
अब झगड़ा करने को भी तू नहीं मिलता,
और मनाने भी अब कोई नहीं आता।

तू गया तो जैसे आवाज़ चली गई मेरी,
खामोशी अब दोस्त बन गई है मेरी।
दिल मानता है तू अब लौटकर नहीं आएगा,
पर यादों का दरवाज़ा कभी बंद नहीं हो पाएगा।

अगर मुमकिन हो कहीं से, एक बार मिलने आ जाना,
सपने में ही सही, थोड़ा सा मुस्कुरा जाना।
बहुत सी बातें अभी भी बाकी हैं मेरे पास,
एक बार आ जा… बस कह दूँ — यार, तू आज भी है मेरे साथ।


-शिवन्या