त्योहारों की रौनक बाजार में छाने लगी है
लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट की आहट आने लगी है
मिट्टी के बर्तन सजाने वालों के दिल में उमंग छाने लगी है
नए दीए में से आई महक गांव की मिट्टी की पहचान कराने लगी है.....
तूफान में दबी जिंदगीयो मैं फिर नजदीकियां आने लगी है .....
गरीबी के कदमों की आवक से लोगों के मन में दान की भावनाएं जागृत होने लगी है .....
दीए की लौ को भीतर से महसूस करती आंखों से हृदय में प्रसन्नता की चमक आने लगी है......
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