आंखों में आकर दिल में बस कर चले गए
ख्वाब में थी जिन्दगी जगा कर चले गए।
रग रग में इस तरह वो समा कर चले गए
जैसे मुझ ही को मुझसे चुरा कर चले गए।
आए थे जिन्दगी के साथ निभाने के वास्ते
एक झटके में ही वो साथ छुड़ा कर चले गए।
आंखें पथरा के रह गई लेकिन वो ए अनुराग
जाते हुए लब्बों से लब मिलाकर चले गए।
©anuragrahi
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