कोख मे जन्मा एहसास नया सा।
किलकारियों से भरा तसव्वुर था।
उसके आने की खुशख़बरी से।हर पल हृदय आतुर था।
पस उजड़ गया संसार वहीं पर ।
सपनों पे हुआ एक वार वहीं पर।
घर ऑगन सब उजड़ा था।
फीका अब दुर्बल मुखड़ा था।
नन्हे कपड़े,वो हाथी घोड़े ।
सब मिलकर शोर मचाते थे।
उजड़ी ममता के जज़्बात।
ख़ुद मे ही ग़ोते खाते थे!
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