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उजड़ी ममता

जीवन ने छेड़ा एक साज़ नया सा।
कोख मे जन्मा एहसास नया सा।
किलकारियों से भरा तसव्वुर था।

उसके आने की खुशख़बरी से।हर पल हृदय आतुर था।

पस उजड़ गया संसार वहीं पर ।
सपनों पे हुआ एक वार वहीं पर।
घर ऑगन सब उजड़ा था।
फीका अब दुर्बल मुखड़ा था।
नन्हे कपड़े,वो हाथी घोड़े ।
सब मिलकर शोर मचाते थे।
उजड़ी ममता के जज़्बात।
ख़ुद मे ही ग़ोते खाते थे!



#©mannjaisy