Y your_rohit en July 23, 2025 उलझी शाम.....!! उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है;इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो..©rohit123