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-----उम्मीद----

एक उम्मीद है जो हम सब को थामे रख्खी है,
की शायद फिर से सब कुछ पहले जैसा हो जाये।
वो बुज़ुर्गों की सुबह उठ कर पार्क में जाने की उम्मीद,
स्कूल बस के आने पर बच्चों के स्कूल जाने की उम्मीद,
सन्नाटो के इस शोर को खत्म करने की उम्मीद।।
इस महामारी से पूरा देश जूझ रहा है,
आखिर एक उम्मीद ही तोह है हम सब को थामे रख्खी है।
अब ज़िन्दगी से ज़्यादा मौत की चीखें सुनाई देती है,
फिर भी एक उम्मीद है जो हम सब को थामे रख्खी है।
मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे से ज़्यादा हॉस्पिटल की दीवारों ने लोगों की दुआएं सुनी है, क्योंकि डॉक्टर्स से लोगो की उम्मीद है, वो उम्मीद ही लोगो को थामे रख्खी है।।
यह वक़्त है हम सब को साथ रह कर लड़ने का,
आओ मिलकर साथ हम एक दुआ करते है, 'ऐ खुदा' तू जहां भी है, हमारी इतनी सी दुआ सुन ले,
इन् सन्नाटों के शोर से ज़्यादा हमे शहर की रौनक पसंद है।
माना कि ये ज़िन्दगी हमे तूने दी है और इसे लेने का हक़ भी तेरा है, पर ऐसी मौते अब देखी नही जाती।
ये दुनियां तूने बनाई है इसे ऐसे खत्म मत कर।
हम सबकी तुझसे उम्मीदे है, उन्न उम्मीदों को खत्म मत कर।
आखिर एक उम्मीद ही तोह है जो हम सबको थामे रख्खी है, की शायद तू सब कुछ पहले जैसा कर दे।।
~आकांक्षा
©utopian