वक्त हमारे नजदीक से निकल जाता है
जब हम पलटते हैं तो कुछ तो चला जाता है
उसे रोकने के लिये हम जब हम हाथ उठाते हैं तो वह हमें हाथों की लकीरों में अगला पल दिखा जाता हैं
अगले पल की आस में सहसा मुड़ते हैं तो उम्मीदों का सागर दिल में समा जाता है ,और आंखों में चमकता सा तारा टिमटिम जाता है
ईश्वर के होने का एहसास कुछ इस कदर होता है कि चेहरे पर मुस्कुराहट की नाव का जहाज बन जाता है
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