उनके दर का रास्ता अब बेगाने हो गए हैं
कि उस गली में गए अब जमाने हो गए हैं।
है गहरा मुझसे गम का वास्ता कोई
कि दुनिया के गम अब मेरे दिवाने हो गए हैं।
इश्क में नजात कहाँ जो भुलाने चला हूं मैं
इश्क के तो पास मेरे अब कई परवाने हो गए हैं।
जो दिन अपने तौर-तरीके से गुजारे थे हमनें
वो दौर तो जैसे अब फसाने हो गए हैं।
बेझिझक बेइंतिहा जिनसे करते थे ठिठोलिया
अब मेरे सारे वो दोस्त सयाने हो गए हैं।
आंखों के सामने से नहीं कभी जाता ये धुंधलापन
जैसे उनके फिराक में घर मयखाने हो गए हैं।
©anuragrahi
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