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अँधेरो की कोई औकात नहीं,
दस दिन की कोई बात नहीं ,
नन्हा पथिक है अभी ,
तू बस उस path पर चलता जा l
धैर्य ना खोना अपना तू ,कदम अगर डग मगाए ,
याद कर सजे उन सितारों को ,
कदम कदम तू बढ़ता जा ,अपनी मंजिल पर चलता जा l
बचे दिनों में दीपक जैसा तू जलता जा ,
मैं फिर से बिखरू, अब ऐसी कोई रात नहीं ,
अंधेरो की कोई औकात नहीं,
दस दिन की कोई बात नहीं l
Comptative examination
©sgupta