V

उठो

उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो,
जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो,
नई प्रात है नई बात है, नया किरन है, ज्योति नई,
नई उमंगें, नई तरंगें, नई आस है, साँस नई,
युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो,
उठो, धरा के अमर सपूतों पुन: नया निर्माण करो,
डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं,
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं,
नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो,
उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो,
कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है,
धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है,
नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो,
उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो,
सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है,
तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है,
शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो,
उठो, धरा के अमर सपूतों पुन: नया निर्माण करो।
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©vicky
©vikasgarg