M

"वातावरण"

यूं तो समुद्र भी बादल बन जाता है
सूर्य की किरणों पर ओस का धुंधलापन छा जाता है
प्रकृति के बदलने से भीतर में खूबसूरती का आलम समा जाता है
पर तू अपनी फितरत मत बदलना ऐ बंदे क्योंकि फिर ईश्वर की इबादत का मंजर हर जर्रे से दूर चला जाता है...
©myemotions