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वह मटके वाली लड़की रोज की तरह है दोपहर बाद मेरे गांव और शहर के बीच का वह स्थान…

वह मटके वाली लड़की
रोज की तरह है दोपहर बाद मेरे गांव और शहर के बीच का वह स्थान जहां हम अक्सर दोस्त एक दूसरे का शहर से लौटने का इंतजार करते थे उस दिन भी अशोक मेरा इंतजार कर रहा था।
बख्तल की चौकी जी हां यही नाम है उस जगह का जहां अक्सर हम लोग शहर से आते वक्त एक साथ मिलकर गांव आया करते थे। बरगद का बहुत बड़ा पेड़ और वह बहुत पुराना भी था इतना पुराना कि मैं उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता था उसी पेड़ के नीचे था एक कुआं जिसका पानी तेज लू भरी गर्मी में भी बहुत ठंडा रहता था क्योंकि बरगद के पेड़ के नीचे वह कुआं भी हमेशा छाया में ढका रहता था हुए के ऊपर एक रस्सी और एक बाल्टी हमेशा रखी रहती थी ताकि कोई भी राहगीर जो पानी का प्यासा हो वह कुए से पानी निकालकर पी सके
गर्मी में सुस्ताने कि वह बहुत अच्छी जगह थी राजस्थान का इलाका गर्मी और रेगिस्तान के लिए जाना जाता है ऐसी परिस्थितियों के बीच गले बरगद के पेड़ के नीचे ठंडे पानी के कुएं के साथ ठहरना किसी भी सुकून से कम नहीं था शायद वह स्थान था उस रास्ते पर जाने वाले सभी राहगीरों के लिए किसी मनाली से कम नहीं था।
गर्मी से बेहाल पसीने से लथपथ जैसे मैं बख्तल की चौकी पहुंचा अशोक मेरा इंतजार कर रहा था और वह मेरी साइकिल रोककर बोला यार सील रुक देख मैं तुझे क्या दिखाता हूं उसके संबोधन में मेरी उत्सुकता बढ़ने लगी और मैं ठहर कर बजाय सुस्ताने के पूछने ना लगा कि यार क्या दिखाना चाहता है
वह मुझे पुणे के पास पड़ी झोपड़ियों के पीछे ले गया जहां की एक भाड़ भुजा भूज रहा था। चना और जो को बुझाने वाली लगभग सभी औरतों की और उन्हीं औरतों के बीच में एक युवती थी थी उसका चेहरा देखकर मुझे इशारा करके बताता है कि देख यार कितनी सुंदर लड़की है।
सच मानना मैं उस लड़की को देखकर एकदम आवास रह गया क्योंकि इतनी गोरी लड़की उससे पहले मैंने कहीं नहीं देखी थी उसका चेहरा मोहरा बिल्कुल किसी फिल्मी हीरोइन की तरह था वह बेहद सुंदर थी उसके बाल सुनहरी थे वह सूट सलवार पहने हुए थी उन दिनों लड़कियों का सूट सलवार पहनना नए नए चरण में आया था क्योंकि राजस्थान में अपनी परंपरागत पोशाक में ही औरतें और लड़कियां रहती थी सूट सलवार पंजाबी पोशाक की सूट सलवार शरीर के अधिकांश हिस्से को ढक लेता है इसलिए वह महिलाओं और लड़कियों में बहुत तेजी से अपना स्थान बना रही थी
सूट सलवार में किसी लड़की को उस जमाने में देखना बिल्कुल ऐसे ही था जैसे आजकल हम किसी लड़की को रिप्ड जींस पहने हुए देखते हैं। उस उस जमाने में सूट सलवार भी किसी आधुनिक फैशन से कम नहीं था।
हम दोनों दोस्त करीब आधे घंटे तक उस लड़की को एकटक देखते रहे और हम अंदाजा लगा रहे थे कि आखिर वह लड़की आई कहां से है कहां रहती है किसके साथ आई है किस साधन से मैं आई है।
शाम होने को भी आ रही थी और हमें गांव भी लौटना था उसका इंतजार करते-करते हम काफी लेट हो चुके थे लेकिन हम उसका रहने का स्थान का पता नहीं लगा पाए और ना ही हम उस लड़के से किसी भी तरह की कोई बात कर पाए।
कई दिनों तक मेरे जहन में उस लड़की का चेहरा घूमता रहा और मैं उसे याद करता रहा।
करीब 1 महीने बाद गांव से शहर आते जाते एक बस्ती के पास पानी का मटका सिर पर रखे हुए अपने घर ले जाते हुए उसे मैंने देखा तो मैं उसे पहचान गया लेकिन वह मुझे नहीं जानती थी क्योंकि उसने मुझे वहां देखा भी नहीं था।
असल में दिल्ली रोड पर मुख्य मार्ग के किनारे किसी कंपनी ने एक पानी का नल लगवा रखा था उस नल में से ही पड़ोस की कॉलोनी वाले पानी भरकर ले जाते थे शहर से करीब 4 किलोमीटर दूर वह कॉलोनी नई नई बस रही थी वह अभी बहुत कम बसावट थी वह लड़की भी उसी नल से पानी लेकर अपने घर पर मटका भर कर ले जाती थी।
धीरे-धीरे हमें शाम का वह समय भी ज्ञात हो गया कि कब वह लड़की पानी भरने के लिए आती है और हम साइकल धीरे धीरे चलाते हुए उसका ही इंतजार करते थे जैसे ही वह लड़की रोड पार करती मैं अपनी साइकिल की चैन को उतारकर उसे दोबारा से चढ़ाने का बहाना करता रहता ताकि या तो उससे बात हो जाए या वह मुझे पहचानने लगे और लगभग एक डेढ़ महीने के बाद वह लड़की मुझे बहुत अच्छी तरह से पहचानने लगी थी इस बारे में मैंने अपने दोस्तों को बताया कि वह लड़की मुझे अब जाने लगी है पहचानने लगी है और यह सिलसिला लगभग 6 महीने तक चलता रहा।
मैं शरीर में बेहद दुबला पतला किंतु लंबा शरीर का लड़का था मैं कोई आकर्षक भी नहीं था तुम मेरे दोस्त मेरा मजाक उड़ाते थे कितनी सुंदर लड़की वह तो मैं पसंद ही नहीं कर सकती भले ही वह तुम्हें पहचानने लग जाए लेकिन वह तो बहुत खूबसूरत है और वह तुझे पसंद नहीं करेगी।
लेकिन मुझे भी बड़ा वहम सा होता था कि कहीं ना कहीं यह मुझे पसंद करने लगी है लेकिन अभी तक हम लोगों के बीच कोई बात नहीं हुई थी इसलिए मैं बता नहीं सकता था कि वह मुझे पसंद करती हुई है या नहीं लेकिन शाम का वह वक्त रोज के सिलसिले में शामिल हो गया।
उन दिनों में कॉलेज में ही पढ़ता था और शहर से करीब 12:00 13 किलोमीटर दूर मेरा गांव था जहां से मैं साइकिल के द्वारा अपनी कॉलेज जाया करता था सुबह के समय शहर की ओर जाना शाम को शहर से गांव की ओर लौटना यही मेरा दैनिक क्रियाकलाप में शामिल हो गया था जब से वह लड़की देखी थी तब से मेरा शहर आना जाना रोजमर्रा में शामिल हो गया।
इसे मैं इसे इस तरह भी कह सकता हूं कि अब मेरा शहर आना जाना नियमित हो गया था क्योंकि आते और जाते वक्त उस लड़की को देख लेना भर को अपनी किस्मत समझने लगा था सही मायने में मैं उस लड़की को बहुत चाहने लगा था वह थी ही इतनी सुंदर कि कोई भी उसे है देखता तो उस पर लट्टू हो ही जाता था।
इस दिनचर्या में एक ऐसा दिन भी आया जब मैं सुबह कॉलेज की ओर अपनी साइकिल पर जा रहा था सुबह के वक्त उस लड़की को मेरी निगाहें कम ही घूमती थी क्योंकि सुबह वह लड़की मुझे दिखाई नहीं देती थी हां शाम को मैं उसे रोज ही देख लेता था उस दिन का वह सुबह का दिन था जब मैं साइकिल से चला जा रहा था और उसकी कॉलोनी के बगल से गुजर कर थोड़ा जैसे ही आगे निकला था एक मोटरसाइकिल के पीछे वह लड़की बैठ कर जाती हुई दिखी उसने भी मुझे देख लिया और मैंने भी उसे देख लिया मैं तो देख कर मुस्कुराने लगा और वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी मोटरसाइकिल पर जाते जाते हैं वह मुझे कुछ इशारा करने लगी और थोड़ी देर में देखा उसने अपना रुमाल नीचे रखते हुए उसे उठाने के लिए इशारा करने लगी नीचे डाल कर वह शहर की तरफ चली गई और मैं साइकिल से उतर कर उस रुमाल को उठाकर अपने दिल से लगा दिया।
आज का दिन ऐसा लग रहा था जैसे मेरे दोस्तों के सारे सवालों का जवाब आज मेरे पास आ गया था।
सच मानो आज का यह दिन मेरे लिए एक तरह से मन्नत पूरी करने वाला दिल बन गया।
अब मैंने शाम को जैसे ही लौट रहा था गांव की ओर मुझे वह लड़की पानी का मटका सिर्फ ली है और एक हाथ में पानी से भरी हुई पार्टी लटकाए वह सड़क के किनारे खड़ी हो गई और मैं उसी वक्त वहां आ गया वह मुझे बताने लगी थी सुबह में गोपाल टॉकीज में जैकी श्रॉफ की एक फिल्म देखने के लिए गई थी
मुझे आप बिल्कुल जैकी श्रॉफ की तरह लगते हो एक ही दिन में इस तरह के कंप्लेंट मिलना मेरे लिए किसी अजूबे से कम नहीं था।
सच्चाई मैं बता देता हूं कि मैं जैकी श्रॉफ जैसा बिल्कुल भी नहीं लगता था हां थोड़ा कब जरूर लंबा था पतला दुबला ही भी था लेकिन शक्ल सूरत से कहीं भी जैकी श्रॉफ नहीं लगता था मेरे बाल जरूर लंबे थे जो उस वक्त फैशन के अनुरूप ही थे लेकिन उस लड़की ने जैसे ही मेरी तुलना जैकी श्रॉफ है कि मैं सातवें आसमान पर था और अपने आप को किसी हीरो की तरह समझ रहा था क्योंकि आखिर एक हीरोइन की तरह लगने वाली लड़की ने मुझे इस तरह का कॉन्प्लीमेंट दिया था कि आप जैकी श्रॉफ की तरह लगते हो।
मैं बेहद खुश था लगभग गुनगुनाता हुआ अपने गांव पहुंचा और जैसे ही शाम हुई अपने सभी दोस्तों से मिला आज की पूरी दिनचर्या के बारे में उनको बताया कि किस किस तरह मुझे सुबह उस लड़की ने अपना रुमाल दिया और शाम को वक्त उसने किस तरह मुझे बताया कि वह मैं उसको हीरो की तरह लगता हूं मेरा इतना ही कहना था कि मेरे दोस्त मेरा मजाक उड़ाने लगे थे
मेरा दोस्त अशोक अच्छी कद काठी का बहुत ही सुंदर अच्छे रंग रूप का लड़का था उसकी और कोई भी लड़की बड़ी आसानी से आकर्षित हो सकती थी ऐसा मेरी समझ थी क्योंकि वह चेहरे मोहरे में उस वक्त के सुपरस्टार राजेश खन्ना की तरह उसकी कद काठी और चेहरा मोरा लगता था।
अशोक का मेरो मेरा मजाक उड़ाना मुझे बहुत बुरा लगा और मुझे यह भी महसूस होने लगा कि कहीं वह लड़की मुझे मूर्ख तो नहीं बना रही है क्योंकि मुझे अशोक ने भी यही बताया कि यार वह लड़की इतनी सुंदर है वह तुझे केवल मूर्ख बना सकती है।
लेकिन मेरा दिल यह मानने को तैयार करते ही नहीं था और मैं रोज की भांति उस लड़की से मिलता जुलता था बस आते जाते हल्के 18 डायलॉग हो जाते थे ताकि किसी को सुनाई ना दे और पता भी ना लगे कि मैं दोनों लोग बात करते हैं।
सड़क के जैसे ही कॉलोनी में दोस्ती थी अंदर जाकर के उसका घर था और उसके घर के सामने से ही कच्चा रास्ता निकलता था जो आगे जाकर क्षेत्रों से गुजरता था और फिर घूम कर के मैं उन्हें मुख्य मार्ग पर आ कर के अपने गांव चला आता था अब मेरा यह रूटीन बन गया था कि मैं अपनी साइकिल उसके घर के सामने से गुजरता और खेत के हाथों से निकलता हुआ मुख्य सड़क पर आता था एक दिन अचानक मुझे उसके घर के सामने खेत वाले रास्ते पर एक लड़का जो बहुत हैंडसम था मुझे मिलता है और वह कहता है कि देख मुझे पता है तू इस लड़की के चक्कर में है लेकिन मैं तुझे आधा कर रहा हूं कि तू इस लड़की का पीछा छोड़ दें क्योंकि इस लड़के को मैं पसंद करता हूं यह बात मेरे लिए बहुत ही दुष्कर बात थी क्योंकि मैं यह बात मानने और सुनने को बिल्कुल भी राजी नहीं था और मैंने उससे कहा ठीक है वक्त बताएगा क्या होता है मैं यहां से जाने वाला नहीं हूं और मैं यही से आऊंगा जाऊंगा तुझसे जो बंद पड़े हो कर लेना और हां सुन मैं इस लड़की का पीछा नहीं करता हूं ठीक है यह लड़की मुझे पसंद करती है इसलिए मैं यहां से जाता हूं वह लड़का भी जवाब देता है कि यह बात मुझे पता है कि वह लड़की तुझे पसंद करती है इसीलिए कहता हूं कि वह मुझे पसंद करें इसलिए तू रास्ते से हट जा नहीं तो हमें तेरी बुलाकर की पिटाई करूंगा
मुझे हल्का हल्का डर तो लग रहा था लेकिन मैंने भी सोच रखा था कि मैं अपना रास्ता नहीं बदल लूंगा क्योंकि मैं उस लड़की को बहुत चाहने लगा था कोई लड़की इतनी ही इतनी सुंदर कि मैं से चाहकर भी नहीं छोड़ सकता था और अब जबकि में मुझसे बात करने लगी थी हमारी बातों का आदान-प्रदान होने लगा था तो मैं बताइए कैसे उसे छोड़ सकता था।
इसी तरह समय गुजरता गया और मैं शहर आना जाना लगभग बंद हो गया था क्योंकि आप मेरी परीक्षा में केवल एक महीना बचा था और मैं नहीं चाहता था कि मैं यह परीक्षा में फेल हो जाऊं क्योंकि पूरे साल में कोई ज्यादा पढ़ा नहीं था सिर्फ कॉलेज में ही पढ़ता था घर में आकर बहुत कम पढ़ता था मुझे डरता कहीं महफिल ना हो जाऊं इसलिए मैंने 1 महीने की विराम ले लिया और मुझे उस लड़की की याद आती थी तब भी मैं शहर नहीं जाता था मैंने भी खा लिया अब मैं केवल एग्जाम देकर ही उससे मिलूंगा अब मैं बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं होना चाहता।
आज मैं एक महीने बाद शहर जा रहा था और मैं उसी स्थान पर उस लड़की को ढूंढ रहा था तो मुझे दिखाई दी जाए लेकिन मुझे दिखाई नहीं थी और मैं एग्जाम देने के लिए कॉलेज चला गया शाम का वक्त था एग्जाम देकर गांव की ओर लौट रहा था मुझे उम्मीद थी कि कहीं ना कहीं वह लड़की शाम के वक्त मेरा इंतजार कर रही होगी और आज मुझे जरूर मिलेगी मैं इसी उधेड़बुन में शहर से गांव की ओर आ रहा था कि वह लड़की उसी स्थान पर मेरा इंतजार कर रही थी पता नहीं क्यों मुझे जाते हुए देखा या नहीं लेकिन हां शाम का वक्त था और वह उसी स्थान पर मेरा इंतजार कर रही थी मुझे अच्छा लगा मैं उसे देख कर करके खड़ा हो गया और वह मुझे गुस्से में हो करके बोली संजू तुझे पता है तुझे आज 1 महीने से ज्यादा हो गया तू आया क्यों नहीं मैं रोज तेरा इंतजार करती थी शाम को तो जरूरी करती थी शाम को आएगा तो मुझसे मिलकर जाएगा लेकिन यार तू कहां चला गया था मैं गई थी पता नहीं तुझे कुछ हो तो नहीं गया पता नहीं तू कहां चला गया और मैं बहुत परेशान हो गई थी यार ऐसा मत करना लगातार बोले जा रही थी बात अभी हुई नहीं थी आज बता रही थी देख रहे हैं सुन रहे हैं और तुझे दोनों से बात करना कुछ रहा है वह मुझे डांट तेरी बोली तुझे लोगों की पड़ी है मेरी परवाह नहीं है आज एक महीने बाद आया है और लोगों की परवाह कर रहा है कि कोई सुन रहा है कोई देख रहा है जा मैं नहीं करते लोगों की परवाह मैं ऐसे ही बात करूंगी मैं नहीं डरती किसी से और सुन आपसे जो है ना आना जाना बंद मत करना मेरी हालत बहुत खराब हो गई तुझे देखे बिना आज से याद रखना
रियासत मानना मुझे सच मानना मेरा प्यार बहुत पक्का हो गया था और मुझे पूरा विश्वास हो गया था कि वह लड़की नजर चाहती है मैंने यह बात फिर से मेरे को ओके बताई और मेरे दोस्तों ने फिर से उसे नहीं मारा खैर यह सिलसिला चलता रहा और कई बार ऐसा होता था जब हम दोस्त दोनों एक ही साइकिल पर आया जाया करते थे
उस दिन भी ऐसा ही हुआ जब मैं अपने दोस्त की साइकिल पर आगे डंडे पर बैठा हुआ था और मेरा दोस्त साइकिल चला रहा था जैसे ही उसकी बस्ती आई और मैं उसे कहा किधर से उसके घर के सामने से ले चल उसने अपनी साइकिल सड़क से उतार कर उसके घर की तरफ करती और वह लड़की घर के सामने ही थी हम लोग उतर कर दे खड़े थे वह लड़की आई और मुझे साइकिल से उतारकर मेरे बेतहाशा लिपट गई और मुझे वह जोरों से चूमने लगी मैं अब आप उसे देखता रहा और वह सब मुझे ऐसा कर रही थी मुझे लग रहा था कि आज मेरी मंजिल मुझे मिल गई आज के बाद मेरा दोस्त भी अब मेरी मजाक नहीं हो रहा था क्योंकि उसने मैं सब कुछ आंखों से देखा था जो मैं उसे बताया करता था।
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