हृदय में स्थित प्रसन्नता का भाव उसके धड़कने पर रक्त के साथ समाहित होकर शरीर की प्रत्येक कोशिकाओं तक संचरित हो जाता है और उनमें आत्मीय ऊर्जा भर देता है तथा ह्रदय में स्थित हीनता का भाव कोशिकाओं में पहुंचकर उन्हें विकृत कर देता है
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