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विचार

जिस रफ्तार से हमलोग शहरी बनते जा रहे है।
वैसे-वैसे हमलोग दिखावटी बहुत ज्यादा करने लगे है।
और यही दिखावटी हमारे संस्कृति का नाश करते जा रहा है।
कुंदन कुमार
©kundankumar