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Vijay path

मंजिलों की तरफ में भागता रहूंगा ।
जब नींद घनघोर आयगी मुझे, में भी यूँ हीं जागता रहूंगा।
जब न लहराउंगा विजय पताका मंजिल पर ,
में लक्ष्यों को अपने यूँ हीं दागता रहूंगा ।
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