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विर तुम खड़े रहो विर तुम डटे रहो।

वज्रपात हो आघात हो
चाहे अंधेरी रात हो
आकाश से पाताल तक
विर तुम खड़े रहो विर तुम डटे रहो।
शत्रु के ललकार से
सुनियोजित प्रहार से
साहस रूपी इस ढाल से
विर तुम खड़े रहो विर तुम डटे रहो।
समय की पुकार पर
देश हित के विचार पर
लगा कर तिलक कपाट पर
विर तुम खड़े रहो विर तुम डटे रहो।
गर्व है हमें तेरे धिर पर
उस अचुक तेरे तिर पर
माँ भारती के इस विर पर
विर तुम खड़े रहो विर तुम डटे रहो।
©anuragrahi