मंदी के दौर से निकलने का प्रयास हर कोई कर रहा है,
खुद चलते हैं टेढ़ी चाल, और कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
पैसो को पाने के लिए अपनों से ही छल कपट कर रहा है,
जब हाथ ना आये पैसे तो कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
लोगों को फसाने के लिए लोभ के नए नए जाल बुन रहा है,
जब फस जाता है खुद जाल में तो कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
खुद रहे महलों में, माँ- बाप को वृद्ध आश्रम भेज रहा है,
खुद पहुंचे वृद्ध आश्रम तो कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
सरकारी अधिकारी बनकर , रिश्वत लेकर अपनी जेब भर रहा है,
जब खर्च करने पड़े पैसे तो कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
हर जगह कूड़े के ढेर लगाकर बिमारियों को आमंत्रित कर रहा है,
जब हो जाए खुद बिमार तो कहते है वक्त बुरा चल रहा है,
विकास गर्ग
©vicky
V