वक़्त लगता है
ले नाम रब का, जितना हो सके इस जुबां से,
ख़ुदा की रहमत बरसने में, वक़्त लगता है।
आती हैं कभी खुशियाँ, कभी ग़म ज़िन्दगी में,
रात की गहराई से सूरज निकलने में, वक़्त लगता है।
बुझ जाते हैं कई चराग़ सिर्फ़ आँधियों के डर से,
हर बिखरे ख़वाब को फिर से सँवरने में वक्त लगता है।
रख यकीं खुदा पे, हर चीज़ मुकम्मल नहीं होती फ़ौरन,
हर फूल को शाख़ पे महकने में, वक़्त लगता है।
© विशाल सैनी