वो आधी रात को गुनगुनाने वाले क्या हूए
वो दिल को लुभाने वाले क्या हुए।
सभी अरमां बिखर गए सभी आरजू
वो ख्वाब सजाने वाले क्या हुए।
ये कौन लोग हैं अब मेरे आस-पास
वो दोस्ती निभाने वाले क्या हुए।
आज हर तरफ से आ रही है बेवफाई की बूं
वो हवा मन को महकाने वाले क्या हूए।
अब हर रोज़ समय से सो जाता हूं मैं
वो चैन-ओ-निंद चुराने वाले क्या हूए।
फकत आप हम तो बोझ हैं जमीं के अनुराग
जमीं का बोझ उठाने वाले क्या हूए।
©anuragrahi
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