वो तो ऐसे आके अब हम से मिले
जैसे कोई अजनबी;अजनबी से मिले।
मेरी वफा जैसे बड़ी गुनाह हो गई
वो मिले भी तो ऐसे बेरूखी से मिले।
बहार ही बहार मांगे थे चमन से हमने
दाग ही दाग मुझे जिंदगी से मिले।
ये किस जनम की आदावत है उनकी मुझसे
जो आज तक न कभी खुशी से मिले।
हमने फकत मुफलिसी की बातें की है
गरीब से मिले मगर न थे कभी गरीबी से मिले।
आप जिस तरह अनुराग से मिलते है
आदमी न यूं कभी आदमी से मिले।
©anuragrahi
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