एक चेहरा था जाना पहचाना सा
अपनी ही धुन में खोया वो दीवाना सा
बेखबर थे हम उस जगह से जहां उसके कदम थे
नजर उठाकर देखा सामने वही मासूम चेहरा था
निगाहें पड़ ही गई उसपर खाने में वो व्यस्त था
फिर ना जानें वो कहां गुम हो गया आंखों से परे
एक पल गुजर जाने के बाद फिर दिखा वो
हाथों से इशारा करते हुए फोटोग्राफर को
कुछ ही पल में वो उस भीड़ से निकला
जा बैठा वो एक सज्जन बुजुर्ग के पास
अपनी बातों का मशवरा करने
शाम होने को अाई मै वहां से निकल आई।
©anusingh
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