वो बदलने लगी है।
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पता नहीं क्या हुआ है,
वो उलझी हुई लड़की अब सुलझने लगी है।
वो सहमी-सहमी सी रहने वाली,
अब खुल कर उड़ने लगी है।
कल तक उलझे रहने वाले बाल उसके,
अब खुद ही संवरने लगे हैं।
उसके बंधेे हुए जुड़े की जगह,
अब लहराती जुल्फ़ों ने ले ली है।
वो उदास सी रहने वाली लड़की
अब मुस्कुराने लगी है।
होंठों को ख़ालिस रखने वाली,
अब थोड़ी लाली ओढ़ने लगी है।
वो बेतरतीब सी रहने वाली लड़की,
अब थोड़ा सा संवरने लगी है।
वो सादा सी लगने वाली लड़की,
अब धीरे-धीरे निखरने लगी है।
आँखों में जो ख़ामोशी थी कभी,
अब ख़्वाबों की चमक दिखने लगी है।
जो खुद से भी चुप-चुप कर रहती थी,
अब दुनिया से बात करने लगी है।
शायद किसी ने उसके दिल को
प्यार से छू लिया है कहीं…
या फिर वो खुद ही
अपनी पहचान करने लगी है।
-शिवन्या
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