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वो भी क्या दिन थे🤗😔

वो भी क्या दिन थे
जब खुलकर हसना और
खुलकर रोना था
भाग कर आ जाते थे सब
आँखों का तारा जो सलोना था
बचपन की वो यादें
एक नन्ना सा खिलौना था
न किसी से कोई झगड़ा
एक पलंग पर बिछोना था
ममता का आँचल और
खुशियों से भरा हर कोना था
लेकिन
इन हसीन पलों में
एक तसव्वुर भी घिनोना था
जिसे आज भी याद कर
तकिये से लिपट कर रोने था
बचपन की वो घिनोनी याद
कलंक वो जो धोना था
किया किसी ने भोगे कोई
यह कैसा सबब होना था
उम्र भर बोझ एक ढोना था
उम्र भर बोझ एक ढोना था....
©deeprichu