वो चाहती वहीं थी कि जुबां से बद्दुआ निकले
मुझसे रहने को अलग कोई रास्ता निकलें।
अतित के पन्नों में ज़रा झांक कर देख लो
जाने उसका कौन सा पन्ना मुड़ा हुआ निकले।
जो मेरे हैं बहुत अज़ीज़ इस दिल के करीब
मत पुछिए गर्दिश में उनसे भी फासिला निकले।
हम आह भी नहीं भर सकते इस जख्म-ए-दिल में
हर रोज़ रोज़ एक ज़ख्म अब नया निकले।
जिस शै को चाहां मैंने अपना बना लिया मगर
बेकार साबित हुईं सभी टुटा हुआ निकले।
अनुराग इकरार किस से करे और एहतराम किसका
जिंदगी में जो जो आई सभी बेवफा निकलें।
©anuragrahi
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