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वो एक पत्थर है कुछ बोलता ही नहीं।

वो एक पत्थर है कुछ बोलता ही नहीं।

जिंदगी गुज़र गई हयात की तर्जुमा करते करते

मुहब्बत बिछड़ गई मुहब्बत का ब्यां करते करते

उस शजर को अब कोई पहचानता भी नहीं

उम्र गंवा दी जिसने राहों को सायबां करते करते

तुने मेरे दिल पर एक झटके में ही छाप छोड़ दिया

मैं नाकाम रहा तुझपर इक निशां करते करते

वो एक पत्थर है कुछ बोलता ही नहीं

बेवजह मैंने सर फोड़ लिया फुगॉं करते करते

गर वक्त हो तो कभी आओ अनुराग से मिलो

तन्हा हो गया है अब मेहरबां करते करते।