कड़क धूप में,कड़क ठंड में,
जो काम करे,वो है किसान।।
लालच है उनको,वर्षा आने की
वो आकाश को देखा करते है।।
कड़क धूप में,कड़क ठंड में,
बारिस में काम वो करते है।।
वो है किसान।।
लालच है उनको खाद, बिजली, पानी की,
ये थोड़ा सस्ते मिल जावे।।
दिन हो या फिर रात हो,
जो काम करे ,वो है किसान।।
लालच है उनको,फसल उनकी खूब फले,
फसल का मुवाबजा अच्छा मिले।।
जो दिन भर काम करे, वो है किसान।।
अच्छी फसल देख कर जो मुसकुरया करते हैं,
खराब फसल को देखकर जो मुरझाए रहते है।।
दिन रात खेतो जो रहते है, वो है किसान।।
लाचारी भी उनको होती हैं,
ओला कही न पड़ जाए।।
लाचारी भी उनको होती है,
सूखा कही न पड़ जाए।।
जो कभी न आराम करें, वो है किसान।।
आज देश के किसानों की हालत है गम्भीर,
रोज है करते आत्म हत्या मुद्दा है गम्भीर।।
किसानों ने जो खेती करना छोड़ दिया।।
सबको मुश्किल हो जाऐगी।।
सबसे विनती है मेरी सोचो किसान के बारे मे,
जो सबके बारे ने सोचता है वो है किसान।।
वो है किसान- चरन सिंह
©charan
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