वो गुड की मिठास जैसी
वो सावन की बरसात जैसी
वो कोयल की गीत है मानो
वो दिल के मीत जैसी
अब मत पूछना वो कैसी है.......
वो मेरे अल्फाज जैसी
वो चांदनी रात जैसी
वो नदी की शीतलता मानो
वो है आफताब जैसी
अब मत पूछना वो कैसी है........
वो गाने की सोर जैसी
वो जंगल मे मोर जैसी
वो मेरे लिए दर्पण है मानो
वो अनपढ़ मेरे माँ जैसी
अब मत पूछना वो कैसी है........
©avyakt
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