वो मेरे लिए एक खजाना छोड़ गया है
रात दिन रोता रहूं बस बहाना छोड़ गया है।
खुशी के आँखों में हो गम का भी बसेरा
हर तरह से महफुज ठिकाना छोड़ गया है।
है मरकज दिल ये मेरा सारे जहां के गमों का
शब-ए-बारात में मेरे साथ आना छोड़ गया है।
गुस्ताखीयां तो है वसूल-ए-जिन्दगी में जरूर
मगर देखो किस तरह मुझे जान बेगाना छोड़ गया है।
किस तरह गुजारू मैं अपनी बची की जिंदगी
कई पन्ने में लिखी हुई दर्द भरी अफसाना छोड़ गया है।
ये आंसू पोछ लो अनुराग अब हमेशा के लिए
जलता हुआ चिराग वो तेरे सिरहाना छोड़ गया है।
©anuragrahi
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